नितीश है की मानते ही नहीं
नितीश है की मानते ही नहीं
पहले प्रशांत भूषण फिर केजरीवाल और फिर राहुल गाँधी ने सहारा डायरी को लेकर मोदी पर ज़ोरदार हमला किया| यह दूसरी बात है की मीडिया ने भी इस डायरी के तथ्यों पर विश्वास ना करते हुए इन सभी नेताओं की खिचाई कर दिया| परन्तु लालू भी इस डायरी के खेल में खूद पड़े और मोदी से इस्तीफे के मांग कर डाली| तथा सुप्रीम कार्ट की निगरानी में इस मामले के जांच की मांग की है।
लालू चाहते है की उनके सहयोगी नितीश भी उनकी बात मानकर उनके कदम से ताल मिलाये| परन्तु नितीश है की मानते ही नहीं| बिहार के मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संकेत दिया कि वो किसी भी हालत में उस मुहिम के साथ नही रहेंगे जिसके तहत सहारा डायरी को मुददा बनाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से जवाब व इस्तीफे की मांग की जा रही है। इससे साथ ही नीतीश कुमार ने महागठबधंन नेताओं को एक और जोर का झटका दिया।
साथ ही नितीश कुमार के निर्देश पर केसी त्यागी ने कहा कि ‘‘हम चाहते हैं कि सबसे पहले सहारा की कथित डायरी लोगों के सामने आये, उसको सार्वजनिक किया जाए तथा जितने लोगों का नाम उसमें दर्ज है उन सबसे सघन पुछताछ की जाए। खबरों के अनुसार उस तथाकथित डायरी में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री तथा कांग्रेस की उत्तर प्रदेश की सीएम उम्मीदवार शीला दीक्षित, मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान तथा छत्तीसगढ़ के सीएम रमन सिंह के अलावा देश के कई नामी गिरामी नेताओं का नाम हैं।’’
नीतीश कुमार के इस ताजा स्टैंड महागठबंधन में शामिल घटक दल के नेताओं को सकते में आ गए है।
जब कांग्रेस प्रवक्ता(?) ने लालू प्रसाद यादव से मुख्यमंत्री की मंशा के बारे में जानना चाह तब लालू ने उनको सीधे नीतीश कुमार से चर्चा को कहा और संकेत दिया की नोटबंदी पर विपरीत स्टैंड से लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के बीच में सबकुछ ठीक नहीं है| दोनों के बीच बातचीत बंद है। लालू चाहते है और प्रयास करते रहे कि नीतीश कुमार नोटबंदी पर लिए गए अपने स्टैंड से पलटकर विपक्ष के साथ जुड़ें। पिछले दो दिनों में कम से कम 5 दूतों को भेजकर उन्होंने सीएम को मनाने की असफल कोशिश की है। लालू को पूरा विस्वास था कि नीतीश कुमार राजद के द्वारा आहूत नोटबंदी विरोधी 28 दिसंबर के राज्यव्यापी आन्दोलन में स्वयं जुड़ जायेंगे| मगर यह नही हुआ| नितीश २८ दिसंबर को दिल्ली से दूर अपनी यात्रा में व्यस्त रहे| क्योकि नितीश मानते ही नही|




