नोट बंदी के पीछे असली आदमी कौन?

नोट बंदी

नोट बंदी नोट बंदी एक ऐसी घटना है जिसे आधुनिक भारत के इतिहास से हटाया नही जा सकता| 8 नवम्बर 2016 तो हमेशा-हमेशा के लिए भारतीय इतिहास में दर्ज हो गया है| हांलाकि इस बात का पूरा खुलासा शायद कभी भी न हो की नोट बंदी के पीछे असली आदमी कौन था? यह तो तभी पता चलेगा जब स्वयं मोदी इस बात को बताये|

परन्तु उडती चिड़िया को खबर लगी है इस नोट बंदी के पीछे जिस व्यक्ति का नाम उभरकर सामने आता है वह है हारमनी इंडिया फाउंडेशन के संरक्षक हर्ष दोवल| इनकी ही सब प्लैंनिंग थी की कब नोट बंदी होगी, किस मूल्य के कितने नोट छापेंगे, कहाँ कहाँ कितने-कितने नोट भेजे जायेंगे| जो शायद इनके प्लानिंग में नहीं आई या यो कहिये की छूट गई वह थी ATM के तकनीक जिसमे बदलाव चाहिए था नए नोटों को बाटने के लिए| इस तकनिकी बदलाव ने नोट वितरण को काफी झटका दिया|

हालांकी उडती चिड़िया को यह भी पता चला है की अरुण जेटली के एक मुंहलगे पत्रकार ने जब बार बार जेटली को कोंच-कोंच कर पूछा की क्या यह सही है की स्वयं अरुण जेटली को नोट बंदी की पूर्व सूचना नहीं थी तब अरुण जेटली ने मुस्कुराकर उनको नोट बंदी का वह अधिसूचना दिखया जिसपर उनके ही हस्ताक्षर थे| इसका क्या अर्थ है और हर्ष दोवल का अजित दोवल से क्या रिश्ता है इसका अनुमान आप स्वयं ही लगाये तो उचित होगा|

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