लालू का मुलायामीकरण करने की तैय्यारी

राजनीति में कई वर्ष आगे की रणनीती का बीज आज बोया जाता है| एक घटना से सबक लेकर दूसरी घटना की नीव रक्खी जाती है| मुलायम सिंह के पारिवारिक घटना भारतीय राजनीति में कब और क्या रंग लाएगी, यह तो वख्त ही बताएगा| परन्तु इस पारिवारिक फूट से सबक लेते हुए मोदी ने लालू परिवार में फूट डालने का अंकुर दाल दिया| और यह जब हुआ जब मोदी पटना प्रकाश-उत्सव में गए थे|

वहां के बिशेष तौर पर लालू के जेष्ट पुत्र और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव का खैरमकदम किया| बड़े प्यार से तेज प्रताप का हाथ अपने हाथो में लेकर उनका हालचाल पूछते हुए बोले, “आपकी बांसुरी सुनी| वाह आप तो ‘कृष्णावतार’ लगते है| अब मैं आपको कृष्ण-कन्हैया कहूँगा|”

इसपर तेज प्रताप यह कहते नही अघाते है कि “पीएम ने मेरे को पूछा, अपन को कृष्ण-कन्हैया कहकर सम्बोधित किया, मेरे हेल्थ को लेकर टीप्पणी की, जबकि मेरे छोटका तेजस्वी को उन्होने एकदम भाव नहीं दिया। इससे साफ है कि मैं अपने छोटे भाई से बड़ा नेता हूँ|”

सैंड रहे कि अभी हाल फिलहाल में तेज प्रताप को केंद्र की तरफ से वाइ कैटेगरी की सुरक्षा प्रदान की गई है| जिसके कारण उनके पैर ज़मीन पर नही पड रहे है| दूसरी तरफ लालू के उतराधिकार को लेकर दोनों भाइयो में मची खीचतान किसी से छिपी नहीं है|

अब स्वभाव से सरल तथा राजनीति के चालो से नावाकिफ तेज प्रताप यादव यह नही समझ पा रहे है की केन्द्र सरकार ने वाई दर्जे की सुरक्षा उनका राजनैतिक कद बढ़ाने के लिए नहीं है| और साथ ही उनको यह भी समझ में नहीं आ रहा है की प्रधानमंत्री के कुशलक्षेम पूछना के पीछे क्या मकसद है|

यदि तेज प्रताप में राजनैतिक बुद्धि की प्रखरता होती तब वे अपने प्रति सदभाव को नितीश और बीजेपी के बीच खाई को कम होने से जोड़ पर तथा पूर्व इतिहास से मिला कर देखते तो उनको समझ में आता की किस तरह बीजेपी यादव जाति के प्रबल सर्मथन से ही विरोधियों को शिकस्त देने तथा बिहार में अपना बेस मजबूत करने की कोशिस में लगा है|

सीधी सी चाल है कि भयंकर रूप से मज़बूत लालू प्रसाद यादव को उनके परिवार में फूट डालकर पछाड़ा जाये| तेज प्रताप यादव लालू परिवार की बेहद कमजोर कड़ी हैं। कई बार घर में भी उत्पात मचा चुके हैं। उनको अपने छोटे भाई तथा बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वनी यादव के बढ़ाते राजनैतिक कद से परेशानी है| सीधी सी बात है बीजेपी कई साल आगे की चाल चल रही है|

पाठकगण इस बात को जान ले की दिसम्बर के अंतिम सप्ताह में तेज प्रताप यादव की वृंदावन यात्रा में उनका और उनके मित्रो की खातिरदारी एक खांटी संघी में किया था| तेज प्रताप इस खातिरदारी  की तारीफ़ करते नही अघाते और अपने ख़ास मित्रवर्ग में बार-बार फुसफुसा कर कहते रहते है कि ”देखियेगा राजा तो एक दिन हम ही बनेगे।”

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