नितीश के धोबिया पाट पर सभी चित
अब हमारे देश में एक ही पूर्णकालीन काम रह गया है और वह है चुनाव| बाकी सारे काम जैसे चुनावी वादों को पूरा करना, पाकिस्तान का मुंह तोड जवाब देना, कश्मीर और नक्साली समस्या का समाधान, देश का चौमुखी विकास इत्यादी सभी अंशकालीन अर्थात जब समय मिले और फुर्सत हो तब करेगे वाली स्थिति में चले गए है|
तो UP के बाद दिल्ली, दिल्ली के बाद गुजरात, राजस्थान, हिमाचल पर विजय पाना है| परन्तु ये सभी चुनाव तो मात्र राह है, असली लक्ष्य तो 2019 में दुबारा सत्ता पर काबिज़ होना है| चुनाव दर चुनाव हारता विपक्ष पस्त सा होता जा रहा है| 2019 में प्रधान मंत्री का सपना पालते ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, मुलायम सिंह यादव, राहुल गाँधी, और सबसे ऊपर अरविन्द कजरीवाल चुनावी दंगल में एक के बाद एक करके घायल हो अपने घाव सहलाने में लगे है|
परन्तु कोई तो है जो इस सबसे परे मुस्कुरा रहा है| वह देख रहा है की यदि किसी अन्य में दमखम रह गया हो तो उसे भी परोक्ष रूप में पटकनी दे अपनी राह प्रशस्त करे; जैसा की उसने केजरीवाल, राहुल गाँधी और अखिलेश यादव को पटकनी मार; लालू यादव के बेटो और उनकी छिपी सम्पत्ति का खुलासा कर उनको प्रधानमंत्री के दावेदारी से परे धकेल दिया है| यह मझा और सुसंस्कृत राजनैतिक व्यक्ति और नहीं बल्कि अपने प्रिय निक्कू उर्फ़ नितीश कुमार है|
आप सोच रहे होंगे की लेखक सनक गया है| भला किस तरह नितीश कुमार किस तरह लालू यादव, अखिलेश सिंह, राहुल गाँधी के साथ साथ केजरीवाल को खत्ते-खाते में डाल सकते है? परन्तु दोस्तों हुआ तो यही है|
यकीन नही आता तो याद कीजिये UP का चुनाव की सारी तैय्यारी होने के बाद अचानक एक दिन बिना किसी से विमर्श किये नितीश ने UP के चुनाव में भाग लेने से इनकार कर ना केवल अपने हज़ारो कार्यकर्ताओं को बिजली का शाक दिया था बल्कि विपक्ष की राजनैतिक गणित में उलटफेर कर दिया था| क्योंकि यह तो पक्का था की यदि UP चुनाव में नितीश चुनाव अपने पूरे दमखम से उतरते तो बीजेपी के २-३% वोट ज़रूर काट देते जिससे बीजेपी अपने महान जीत से दूर होकर गठबंधन करने को मजबूर हो जाती और जिसका सीधा लाभ अखिलेश+राहुल गठबंधन को मिलता| फिर बेशक अखिलेश उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री दुबारा ना बनते परन्तु अखिल भारतीय स्तर पर विपक्ष का एक सशक्त झंडाबरदार अवश्य बन जाते| मतलब नितीश के प्रबल प्रतिद्वंदी| यह था चाल नंबर #1|
अब चाल नंबर #2:- सबको मालूम था की जद(उ) कितना भी जोर लगा दे परन्तु दिल्ली के नगर निगम चुनावों में उसे कोई भी विशेष उपलब्धि नही होने वाली और फिर दिल्ली के नगर निगम के चुनाव JD(U) के लिए कोई माने भी नहीं रखते है| फिर भी नितीश ने दिल्ली में पूरा दमखम ठोक दिया| इस अदने से चुनाव के लिए नितीश ने अपने 11 मंत्रियो उतारे जिन्होंने बिहार निवास मे 15 दिन कैंप करके चुनाव में खड़े 111 प्रत्याशियों का प्रचार किया था। पूरी दिल्ली में जेडीयू को कुल 46497 मतदाताओं ने अपना मत दिया। देखने में ये मामूली से मत है| परन्तु ये उन सीटो पर मिले जहा यदि ये AAP को मिलते तब वे 30-35 सीट और जीत जाते| तब भी आम आदमी पार्टी हारती तो तब भी परन्तु तब अरविन्द केजरीवाल की साख और व्यक्तित्व पर इतना बड़ा दाग ना लगता|
अखिलेश यादव के साथ साथ राहुल गाँधी को भी शर्मनाक पराजय दिलाने में सहायक हो नितीश ने इन दोनों को तो केजरीवाल समेत रास्ते से हटा ही दिया है| ममता बनर्जी को बीजेपी ने शारदा मामले में कुछ यो लपेट लिया है की ममता दी प्रधानमंत्री पद भूल अपने घाव सहलाने में व्यस्त है| नवीन पटनायक अपने ख़राब स्वास्थ के कारण अधिकतर अमरीका में ही रह रहे है| सोनिया ने डोर हाथ से छोड़ दी है| प्रियंका अभी कुछ भी नहीं है| ऐसे हालत में लालू यादव नितीश के प्रतिद्वंदी है| तो लालू के जड में मट्ठा देने के लिए नितीश के पूर्व सहयोगी सूमो अर्थात सुशील मोदी ने लालू के सुपुत्रों तथा उनकी पारिवारिक अघोषित तथा आय से अधिक सम्पति का खुलासा सबूत समेत करना शुरू कर दिया है| राजनीति के गलियारों में भनभनाहट है की इन सम्पतियो के सबूत निक्कू जुटा रहे है|
राजनीति में कोई भी सगा नहीं होता| ना ही कोई स्थाई दोस्त या दुश्मन होता है| परन्तु जिस तरह के चाल नितीश चलते नज़र आ रहे है उससे यही प्रतीत होता है की 2019 को मद्दे नजर जो भी गठबंधन बनेगा उसके मुखिया नितीश ही होंगे और सोनिया, राहुल भी परदे के पीछे रह नितीश को दूसरा मनमोहन सिंह बनाने की तमन्ना ज़रूर पालेंगे|
2019 बहुत दूर नहीं है| देखते रहिये इस पोलिटिकल ड्रामा को जिसकी अनगिनत पर्त दिन-ब-दिन खुलती जायेंगी|




