नोट बंदी की मार से बेचैन लालू-पार्टी का नितीश पर दबाव

नोट बंदी की मार से जनता को उतनी तकलीफ नहीं हुई जितनी नेताओं को हुयी है| बेचारो की सारे जीवन की कमाई कपूर की तरह उड़ गई| केवल उसकी महक भर रह गई| जिन हरे हरे नोट को देखकर कभी मन हरा ही जाता था उनको आज देखकर मितली आने लगी| कुछ दिन तो ठीक चला परन्तु अब तो खाने के लाले ही पद गए|
नोट बंदी को लेकर बिहार के महागठबंधन के अन्दर मार काट मची हुयी है| लालू बोले नोट बंदी ने देश को (यहाँ देश का मतलब लालू-पार्टी से समझना होगा) बर्बाद होगया| वही नितीश कुमार उनपर चुटकी काट रहे है कि केन्द्र ने सही कदम उठाया है। एक नोट बंदी के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आन्दोलन शुरू कर रहा है तो दूसरा पहले से अपने निर्णय की समीक्षा करने की बात कह रहा है।
मरता क्या ना करता| नोट बंदी की भुखमरी से परेशान महागठबंधन के बड़े घड़े लालू के एक महाबलशाली नेता(बूझो कौन) ने निक्कू को सन्देश भेजा कि “राज्य के संसाधन पर पहला हक उनकी पार्टी का है| इसलिए राज्य के कुल 38 जिलो में से 20, जिसमें पटना भी शामिल है, को उन्हे सौंपा जाए ताकि उनकी मर्जी से अधिकारियों का ट्रांसफर व पोस्टिंग हो। ‘‘ गठबंधन सरकार में राजद का शेयर ज्यादा है, फलतः उसे प्राफिट भी अधिक मिलना चाहिए’’।
अब राजद के इसबात को नितीश मानते है या नहीं यह तो देखने वाली बात होगी| परन्तु उनको यह तो सोचना ही पड़ेगा कि नोट बंदी की मार को झेलती राजद के पास कोई और चारा तो बचा ही नहीं है-अपने खर्च चलने के लिए|




