राजस्थान की महारानी का सिरदर्द
राजस्थान की महारानी वसुंधरा राजे स्वाभाव से निरंकुश रही है| बाजपाई के कार्यकाल में भी उन्होंने केन्द्रीय नेत्रित्व को दरकिनार कर राजस्थान को अपने मन से ही चलाया| मोदी सरकार के उदभव पर भी रानी साहिबा में काफी उपद्रव करने की कोशिस किया था| परन्तु उनकी एक ना चली|
जब राजस्थान में केंद्रीय योजनाओं की गत बुरी है| स्वच्छ भारत अभियान में भी राजस्थान एकदम फिसड्डी साबित हुआ है। पिछली जन-कल्याणकारी योजनाओं का भट्टा बैठा नाजर आ रहा है, तब भाजपा के सबसे वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाड़ी महारानी के गले कि हड्डी बने हुए है| भाषा में संयमित तिवाड़ी बिना लक्षमण रेखा लांघे वसुंधरा राजे के कुसाशन पर हमला करते रहते है| अपने जन्मदिन के समारोह की आड़ में घनश्याम तिवाड़ी ने वसुंधरा सरकार की कार्यशैली की जम कर खिल्ली उड़ाई। तिवाड़ी का कहना है कि वे सूबे में तीन साल से सरकार को ढूंढ़ रहे हैं। तिवाड़ी तो एकदम चतुर सुजान ठहरे। बोलते वक्त बिना सीमाओं लांघे सूबे के भ्रष्टाचार पर जमकर भड़ास निकालते हैं।
वसुंधरा को मालूम है कि तिवाड़ी को संघ परिवार की पूरी शह है। आलाकमान और संघ का नेतृत्व उनसे अपनी विचारधारा पर अमल नहीं होने के चलते रूठा है। ऐसी हालत में बागी तिवाड़ी के खिलाफ कार्रवाई कररने का जोखिम उठाना सूबे के सूबेदार अशोक परनामी के बस का तो है नहीं क्योंकि उनकी हवा अमित शाह के नाम से टाईट हो जाती है| आलाकमान की इजाजत के बिना परनामी तिवाड़ी को कारण बताओ नोटिस तक नहीं भेज सकते। वसुंधरा खेमे ने तिवाड़ी की काट के लिए जयपुर के पार्टी सांसद रामचरण बोहरा को लगाया था। पर बोहरा को अपने कामधंधों से ही फुर्सत नहीं।
ऐसे में चाहे वसुंधरा राजे का बुरा ना भी हो परन्तु उनके कुशासन में पिसते राजस्थान में बीजेपी की दुबारा जीत मुश्किल में हो जाएगी यदि समय रहते केन्द्रीय नेत्रित्व ने कदम नहीं उठाया|




