मेरी सलाह मानो

किसी की भी हत्या का समर्थन तो किया ही नही जा सकता परन्तु किसी हत्या का राजनैतिकरण भी उचित नहीं है| पहले भी कुछ पत्रकारों की हत्या हुई है| परन्तु जिस तरह वामपंथी पत्रकारों  की हत्या पर शोर हुआ वह अभूतपूर्व है|

अभी गौरी लंकेश की हत्या पर शोर मचा, उसे देखते हुए, इन कश्मीरी उग्रवादियो को इन नक्सलियो और वामपंथियो से कुछ सीखना चाहिए क्योंकि केवल “कश्मीर मांगे आज़ादी” का नारा लगाने से कुछ नही होगा। नाही पत्थरबाजी से कुछ होगा|

अगर कुछ ख़ास ही करना है तो मेरी सलाह मानो और इनकी तरह पत्रकारों का वेश धरो। भगवा के खिलाफ धुंवाधार लिखो। दो मोदी को खुलकर गाली| कसमे खाओ की नहीं बनाने देंगे राम मंदिर| लिखो blog, करो tweet और फेसबुक पर हिन्दुवत को गाली दो| रावण, महिसासुर के गुणों का बखान करो तथा राम कृष्ण को मिथक बताओ| बहुत जल्दी ही बड़े पत्रकार हो जाओगे|

और फिर जब फिर सिक्यूरिटी फ़ोर्स इनको उड़ाएगी तो खाली दिल्ली ही नही पूरे देश के प्रेस क्लब में प्रोटेस्ट होगा। सारे टीवी और अखबार में सरकार के खिलाफ लेख लिखे जाएंगे। इंडिया गेट से गेट वे ऑफ़ इंडिया तक मोमबत्ती जलेंगे। जन्त्रमन्तर से लेकर भुजंदर तक लोकतन्त्र के प्रहरी दारू मुर्गा खाकर भूख हड़ताल करेंगे। और तबतक करेंगे जबतक सरकार अपने खजाने का मुंह खोलकर इनको विज्ञापन दे दे कर मोटा ना करदे।

अब मेरा मुंह ना निहारो| मेरी सलाह मानो|

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