अतिथि सेवा परमो धर्म
हमारा देश हमेशा से अतिथियों को सम्मान देता आया है| अपनों को आग में भूनकर अतिथियों की सेवा और शर्णार्थियो की रक्षा करना हमारे देश का प्रथम कर्तव्य रहा है|
इस देश ने पाकिस्तान से भागे लोगो को अपनाया, तिब्बतइयो को देश ने अपनाया, बंगलादेशियो को अपनाया, श्रीलंका के तमिल को अपनाया| फिर केवल रोहिंग्या के लिए इतना हाय हाय?? एकदम अनुचित कार्य है। एकदम ही गलत है|
अरे आने दो। इनको भी आने दो। हमलोग तो दधीचि के वंशज है। दधीचि की भाँती हम अपनी हड्डी तक दानकर इन सबकी सेवा करेंगे। अभी भी तो बहुत से बहुत लोगो कीसेवा कर ही रहे है। आगे भी करेंगे। चाहे चीनी और पाकिस्तानी भी क्यों ना देश में घुस आएं। अपनी खाल बेच कर इनकी भी सेवा करेंगे। पहले भी किया है आगे भी करेंगे। करते ही रहेंगे क्योंकि हमारी आदत है की जबतक हमारे पिछवाड़े लात ना पड़े तबतक हमको आनंद नही आता।




