तलाक के लिए बहाने की खोज

जम्मू-कश्मीर में में पीडीपी और बीजेपी का गठबंधन शुरू से ही बेमेल रहा है| मुफ़्ती साहेब ने तो इसे किसी तरह खीचा और राम माधवन ने भी उनकी सिनिओरिटी को इज्ज़त देते हुए उनकी बात उपर करते रहे| परन्तु मुफ़्ती साहेब के स्वर्गवास के बात उनकी बेटी महबूबा मुफ़्ती शुरू के कई माह तक सरकार बनाने में आनाकानी करती रही| अंत में सरकारतो बनी परन्तु वह बात ना बनी जिसकी सबको अपेक्षा थी|

पीडीपी शुरू से ही अलगाववाद कि समर्थक रही है परन्तु उसका रुखा संविधान को इज्ज़त देता हुआ था| परन्तु जब फारुख अब्दुल्ला ने खुल्लम-खुल्ला भारत से अलग कश्मीर की बात शुरू किया तब महबूबा मुफ़्ती को अपने पैरो से ज़मीन खिसकती नज़र आई क्योंकि जनाधार फारुख अब्दुल्ला कि नेशनल कन्फोरेंस की तरफ खिसकने की सम्भावना बन गई है|

ऐसी हालत में मुहबूबा इस बेमेल कि शादी को तलाक देने के चक्कर में नज़र आ रही है| मौक़ा खोजने की कोशिस हो रही है| वे समझ चुकी हैं कि भाजपा के साथ गठबंधन ज्यादा दिन नहीं चल पाएगा। तभी तो शनिवार को मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती मंत्रिमंडल की बैठक बीच में ही छोड़ कर चली गईं। आरोप यह है कि भाजपा के विरोध के चलते राज्य पुलिस सेवा के अफसरों को आइजी के पद पर तरक्की देने का मुख्यमंत्री का प्रस्ताव लटका गया। इस मुद्दे पर गरमा गर्मी इस कदर बढ़ी कि महबूबा बैठक अधूरी छोड़ गईं। वैसे भी प्रस्ताव गृह मंत्रालय से आया था। जिसकी कर्ताधर्ता खुद महबूबा ठहरीं। भाजपाई मंत्रियों की अपनी दलील थी। वे तरक्की वाले पुलिस अफसरों को आइजी जैसा बड़ा ओहदा सौंपने से असहमत थे। यह तो रही दिखावटी अनबन। पर अंदरूनी कारण और भी कई हैं।

बेमेल शादी तोड़ना है तो भूमिका पहले से ही बनाना फायदेमंद होता है, ताकी तलाक तलाक तलाक से पहले क़ाज़ी बीच में ना कूद पड़े|

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