अडवाणी और उनकी नाराजगी
मोदी को प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाये जाने को लेकर नाराज़ अडवानी आज भी नाराज़ ही रहते है| वे घर के वो बड़े-बूढ़े है जिनका मान सम्मान तो खूब होता है परन्तु किसी मामले में ना उनसे कोई राय ली जाती है ना ही जब वो राय देते भी है तो उसको कोई मूल्य ही दिया जाता है|
आजकल उनके नाराज़गी का मुद्दा संसद को बार-बार वाधित होना है| भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी संसद के बार-बार स्थगित होने पर काफी नाराज़ बताये जाते है। अफवाह तो उनके द्वारा इस्ताफा तक देने का भी है| और इस अफवाह ने राहुल गाँधी को काफी उत्साहित भी कर दिया है|
टीएमसी सांसद इदरीस अली के अनुसार आडवाणी ने कहा कि “अगर आज संसद में अटल जी होते तो वह भी परेशान होते।” अली ने आगे बताया कि आडवाणी ने कहा, ”कोई जीते या हारे, इस सब हंगामे से संसद की हार हो रही है। स्पीकर से बात करके कल चर्चा होनी चाहिए| जो भी चल रहा है, मैंने संसद में ऐसा नजारा पहले कभी नहीं देखा है। चर्चा होनी चाहिए। मेरा मन इस्तीफा देने का करता है।”
बताया जाता है कि यह सब अडवाणी ने तब इदरीस से कहा जब वो उनकी सहेत का हाल पूछने गए| उत्तर में अडवाणी ने कहा “मेरी सेहत तो ठीक है मगर संसद की सेहत ठीक नहीं है।” उसके बाद अन्य वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी और शांता कुमार ने भी उसी तरह की नाराजगी जताई और लिखित में लोकसभा अध्यक्ष को दिया। याद रहे की ये दोनों वरिश नेता भी अडवाणी के साथ-साथ पार्टी में “मार्ग-दर्शक” की भूमिका में है|
7 दिसंबर को संसद नहीं चलने पर आडवाणी लोकसभा अध्यक्ष और संसदीय कार्यमंत्री पर भड़क गए थे। लंच से पहले 15 मिनट के लिए सदन को स्थगित करने से पहले आडवाणी ने कहा था, “ना ही स्पीकर और ना ही संसदीय कार्यमंत्री सदन चला रहे हैं। मैं स्पीकर के पास यह कहने जा रहा हूं कि वे सदन नहीं चला रही हैं। मैं इसे सार्वजनिक तौर पर कहने जा रहा हूं।” इस दौरान अनंत कुमार चुपचाप उन्हें सुनते रहे। साथ ही अनंत कुमार ने मीडिया गैलरी की ओर इशारा करते यह भी कहा कि उनकी यह टिप्पणी मीडिया में रिपोर्ट कर दिया जाएगा।
जब सदन को स्थगित किया गया तो आडवाणी ने लोकसभा के एक अधिकारी से पूछा कि सदन कितने बजे तक के लिए स्थगित किया गया है। जब उन्हें बताया कि दो बजे तक तो उन्होंने कहा, ‘अनिश्चित काल तक क्यों नहीं कर देते?’
अडवाणी के अनुसार सत्ता पक्ष ही बहस नहीं होने दे रहा है| उनकी इस बात में सच्चाई का अंश भी है| परन्तु यह पता नहीं की यह सच्चाई लोकतंत्र के पुजारी की है या चोट खाए जख्मी शेर की जो भूतपूर्व प्रधानमंत्री उम्मीदवार से भूतपूर्व राष्ट्रपति उम्मीदवार होने के कगार पर है|




