चतुर सुजान उर्फ़ नितीश कुमार उर्फ़ निक्कू

नितीश कुमार को मजाकिया लहजे में निक्कू भी कहा जाता है| निक्कू मतलब अच्छा| नितीश कुमार अपने को इमानदार और दुसरो से हट कर दिखने कि कोशिस में लगे रहते है| यही कि  I am different than others. यह उनकी शक्सियत भी है और सियासी चाल भी| आखिर क्यों नही..वो ठहरे पुराने खिलाडी और पुराने सूरमा, ऊपर से पूरे चतुर सुजान। बिहार के मुख्यमंत्री ऐसी चाल चलते है कि उनकी चाल हर व्यक्ति नही समझ पाता और बड़ी आसानी से आसानी से उनके चक्रव्यूह में फंसा जाता है| ऐसी चाल की चित भी उनकी और पट भी उन्हीं की होती है।

नोटबंदी के मुद्दे में भी वे अपनी चक्र्व्युही चाल चल रहे है| शुरू मैं उनको यह भान हुआ कि नोट बंदी को आम आदमी का समर्थन प्राप्त है और वह प्रधानमंत्री की इसके लिए सराहना करता ही दिख रहा है। तब उन्होंने सरे विरोधियो से हटकर नोट बंदी का स्वागत करते हुए इसका समर्थन किया। उसी समय अन्य विरोधी हवा का रुख पहचानने में नाकामयाब हो कर नोट बंदी का विरोध करने में लगे रहे और जब भारत बंद पूरी तरह विफल हो गया तब भी उनकी समझ में नहीं आये और वे अपना गुस्सा संसद के शीतकालीन सत्र में उतारते हुए उसे चलने नही दिया|

ऐसे में नितीश कि अलग राह पकड़ना सभी को अखर गया| उनकी दबी जुबान में आलोचना भी हुयी| मगर वो निक्कू ही क्या जो दोनों खेमे का चहेता ना बना रहे| नोट बंदी से नकद की किल्लत देख उन्होंने अपने बयान को संशोधित करते हुए कहा कि केवल नोट बंदी से कालाधन समाप्त नही होगा| इसके लिए और कदम भी उठाना पड़ेगा|

वाह नितीश जी| अपने यह बता कर बड़ी सफलता से दोनों नावों में पैर रख कर दोनों नावों को साध लिए| और तो और एक दिन सुबह सुबह अपने बड़े भैया लालू प्रसाद के यहाँ बिन बुलाये धमक कर उनको भी नोट बंदी के समर्थन के राजनैतिक फायदे गिना उनसे भी इस मामले में हुंकार दिला लाये|

काश बीजेपी में भी कोई इतना चतुर सुजान होता|

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