चाचा रुपी चाणक्य का रौद्ररूप
बताते है कि मगध के दरबार में जब चाणक्य की बेईज्ज़ती कर उनको चोटी से पकड कर सभा से बाहर फेका गया तब उन्होंने कसम खाई थी के वे तब तक चोटी नहीं बाधेंगे जबतक वे तत्कालीक मगध सम्राट को समाप्त नहीं कर देंगे| और यही हुआ|
कहते है इतिहास दोहराता है| यही इसबार भी हुआ जब चचा शिवपाल यादव अपने भतीजे और उत्तर प्रदेश के CM यानी मुख्यमंत्री के पास व्यक्तिगत रूप में जाकर अपने लिए जसवंत नगर से और अपने पुत्र आदित्य के लिए मैनपुरी के करहल सीट से टिकट की गुजारिश किया| परन्तु सत्ता और ताज़ी ताज़ी अधिकार की छड़ी पा मदमस्त अखिलेश यादव ने अपने चाचा की एक ना सुनी| उस चाचा को जो उसे अपने कंधे पर घुमाता था, स्कूल में मार ना पड़े इसलिए 20 बहाने बना अपने भतीजे को बचा लाता था, उस चाचा को अखिलेश यादव में खड़े खड़े मना कर दिया और कहा की एक परिवार एक सीट का फ़ॉर्मूला ही लागू रहेगा| चाहे चचा सीट लेलें या उनका लड़का| और अच्छा होगा की लड़का ही सीट ले|
याद रहे एक समय शिवपाल यादव की ताकत समाजवादी पार्टी में मुलायम सिंह के बाद गिनी जाति थी| परन्तु पारिवारिक झगड़े में उनको इतना बेबस बना दिया कि एक दो सीट वह भी ख़ास अपने और अपने सुपुत्र के लिए स्सेट के लिए उनको अपने भतीजे के सामने गिडगिडाना पड़ा|
इसपर शिवपाल यादव बिखर गए और वही अखिलेश यादव को खूब खरी खोटी सूना डाली| वह तो अच्छा था कि यह मगध की राज्यसभा नही थी और शिवपाल मोटी चोटी भी नहीं रखते थे वर्ना उनका हाल भी चाणक्य वाला होता|
परन्तु समाजवादी पार्टी के चाणक्य ने अखिलेश को दुबारा CM ना बनाने देने की कसम खाई और दो दर्जन से भी ज्यादा यादव बहुल्लय इलाके में बीजेपी तथा बसपा की खुलकर मदत कर अखिलेश के दुबारा मुख्यमंत्री बनाने के सपने के जड़ में मठा दे दिया|




