अखिलेश का कांग्रेस को साफ सन्देश
यों तो बात पुरानी हो गई है| परन्तु करें क्या| इस चुनावी घड़ी में कुछ घंटे में बात पुरानी हो जाती है| यह खबर तब की है जब राहुल गाँधी यानी कांग्रेस सपा से गठबंधन करने के लिए तड़फडा रहे थे| तब अखिलेश में उनको खूब घुमाया| जब राहुल अपने मिशन में कामयाब होते नज़र नही आये तब प्रशांत किशोर के कहने पर प्रियंका गांधी ने बातचीत की डोर अपने हाथ में लेलिया|
परन्तु सायकिल का निशान पाते ही अखिलेश तो हवा से बात करते लगे| उन्होंने प्रियंका और राहुल का फोन भी उठाना बंद कर दिया| और तो और सपा ने अपने उम्मीदवारों के नाम उन सीट पर भी घोषित कर दिया जिनपर पिछली बार कांग्रेस ने जीता था| इस बात पर तो कांग्रेस में भेड़िया-धसान शुरू हो गया|
कांग्रेसी उम्मीदवार दुम उठाकर या तो सपा की ओर या फिर बीजेपी के और भागने को तैय्यार हो गए| इस गदर को देख उत्तर प्रदेश के प्रभारी गुलाम नबी आज़ाद में अखिलेश के ख़ास सलाहकार प्रोफेसर रामगोपाल को फोन लगाकर अखिलेश को राहुल और प्रियंका का फ़ोन उठाने की मांग किया| उडती चिड़िया को पता चला है की प्रोफेसर रामगोपाल ने बिना किसी लाग लपेट के कह दिया कि आजकल “राष्ट्रीय अध्यक्ष” होने के नाते अखिलेश बहुत बिजी है इसलिए वे “आपके उपाध्यक्ष” नही उठा रहे होंगे|
इशारा साफ़ था की अध्यक्ष से बात करने के लिए अध्यक्ष को ही फोन करना चाहिए| तब सोनिया गाँधी ने अखिलेश यादव से बात किया और कांग्रेस को आशा से अधिक सीट मिली|




