अमर की ज़ुबानी पुत्र की कहानी
अमर की ज़ुबानी पुत्र की कहानी
तो अखिलेश यादव को मुलायम सिंह ने पार्टी से बहार निकाल दिया| यह तो होना ही था| इसकी कहानी तो तभी लिखी जा चुकी थी जब अमर सिंह को दुबारा पार्टी में लाने के लिए साधना गुप्ता ने शिवपाल से मिलकर खेल खेला था| तथा आयरन कोर फिट नाम से जिम चला रहे प्रतीक यादव को खनन मंत्री प्रजापति के साथ फिट किया गया तथा घोटालो जूझ रहे दीपक सिंघल को अमर सिंह के दबाब मुख्य सचिव बनाया गया था|
जब अखिलेश यादव ने प्रजापति और दीपक सिंघल को निकाल बाहर किया तब साधना के दबाव में मुलायम सिंह को शिवपाल सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाना पड़ा| और यही से परिवार विभाजन की पक्की नीव पड गई|
इसी बीच UP के एक क्षेत्रीय चैनेल ने समाजवादी कलह पर विशेष कवरेज दिखाते हुए साधना गुप्ता को केकई की भूमिका में रंग दिया| अमर सिंह के लिए यह सुनहरा मौका था| उन्होंने मुलायम सिंह को फ़ोन कर बोला, “आप भाभी का अपमान बर्दाश्त कर सकते है| परन्तु मुझसे यह सहन नहीं होगा|” बस फिर चैनल में मालिक मुकेश अम्बानी को फ़ोन लगाकर उनको लखनऊ दरबार में हाज़िर होने का हुक्म सुना दिया गया| मुकेश अम्बानी के यहाँ से उनके देश में ना होने की खबर आई तो अम्बानी घराने के किसी और मुख्य प्राणी को घेरने की योजना बनी| सभी कन्नी काट गये| अंत में HFCL के मालिक नाहटा पकड में आ गए| अब नाहटा का अम्बानी परिवार से कुछ भी लेना देना नहीं है| उनके व्यापारिक सम्बन्ध है Jio के साथ| परन्तु अमर सिंह के दबाव में आकर नाहटा ने ही “भाभी जी” से माफी मांगी|
जब नाहटा चले गए तो विशुद्ध भारतीय पत्नी की भांति मुह बिचका कर साधना बोली, “माफी से क्या हुआ, मुआ हमको केकई तो कहलावा ही दिया|” बात को हल्का करने के गरज से मुलायम सिंह बोले, “तो क्या हुआ, हम भी तो दशरथ हुए ना, जो तुम्हारे पर जान छिडकता है|” साधना ने मौक़ा ताड़कर अपना इक्का मरते हुए कहा, “तो फिर देदो 14 बरस का बनबास अपने बडके बेटवा को|”
तब तो नहीं परन्तु कल 6 वर्ष का बनवास तो अखिलेश को मिल ही गया| अब देखना है की अखिलेश राम की भूमिका अदा करते है य़ा औरंगजेब की|




