योगी के भाग्य में नहीं लिखा राजयोग
गोरखपुर में जुलाई माह में प्रधान मंत्री की रैली में आदमी बहुत कम आये| मैदान तो छोटा था ही, प्रबंधन भी कुछ ख़ास नहीं था| इस रैली का सारा प्रबंधन बीजेपी के फिरे ब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ और सुनील बंसल की जिम्मे था| हालत तो यह था की मंच पर बैठे बैठे जब ओम माथुर ने योगी के बचाव में बोला की बारिश के कारण किसान व्यस्त है इसलिए नही पहुचे तो प्रधानमंत्री ने चुटकी लिया कि वे ज़मीन से जुड़े आदमी है इसलिए उनको मालूम है की जब बारिश होती है तब किसान खाली होता है| तात्पर्य यह है की इस रैली के बाद योगी आदित्यनाथ का राजनैतिक कद कम ही हुआ है| संभवत इसीलिए उनकी टिकट प्रबंधन कमेटी में ना तो बुलाया गया नाही फ़ोन पर उनसे राय ली गई| जबकि आदित्यनाथ के हिसाब से कम से कम 40 सीटो पर तो उनका खूब असर है|
कहाँ एक तरफ योगी आदित्यनाथ को UP में मुख्यमंत्री पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा था और कहाँ उनसे टिकट के बारे में भी राय नहीं ली गई| वैसे तो योगी जी अपने योगित्व को कई बार प्रकट करते हुए अपने आपको CM पद से हटा चुके है| और कह चुके है की भाग्य ने उनको बहुत कुछ डे दिया है| फिर भी सबको पता है की जब टिकट उनके मन मुताबिक़ नहीं मिलते तो वे उन सीटो पर हिन्दू महा सभा से उम्मीदवार खडा कर भितरघात करते है|
यो भी जिस पार्टी में सारा सिस्टम एक व्यक्ति के रहमोकरम पर टिका हो और उसके समर्थक आदित्यनाथ योगी के भाति हो उसे किसी और दुश्मन की आवश्यकता नहीं होती|




