पंजाब की जंग
अब सत्तारूढ़ अकाली दल के नेताओं को हाथ से बाजी ने का आभास होने लगा है| अतः आनन-फानन में अकाली दल लोकलुभावन घोषणाएं कर पंजाब में अपनी जमीन बचाने की कोशिश में जुटे हैं। उनके सहयोगी की भूमिका बीजेपी निभा रही है| तो अंत में उनको भी हार का समाना करना पद सकता है| इसलिए हार-थक कर बीजेपी के स्थानीय नेताओ ने आलाकमान तक गुहार लगाई है कि अगला विधान सभा का चुनाव बीजेपी को अपने बल पर लड़ना चाहिए| परन्तु पंजाब में पिछले दशक से मुफ्त का सत्ता का आनन्द लेते बीजेपी की तलवार में जंग लग चुका है| बीजेपी को अब दुसरे नहीं चौथे स्थान नज़र आ रहा है|
अभी तक की दौड़ में कांग्रेस सबसे आगे और उसके पीछे आम आदमी पार्टी है| ख़राब से ख़राब परिणाम में पंजाब में त्रिशंकु विधान सभा के आसार बन सकते है जिसमे कांग्रेस और आम आदमी पार्टी मिलकर सरकार बना सकती है| अगर गोट अटकेगी तो मुख्यमंत्री के सिंघासन को लेकर अटकेगी| क्योंकि कैप्टन अमरिंदर सिंह यह पद छोड़ना नहीं चाहेंगे और केजरीवाल किसी बड़ी प्रान्त के पूरे पूरे मुखिया बनाने के लिए कुछ भी कर सकते है| साथ ही सिद्धू फैक्टर भी बीजेपी के खिलाफ जा सकता है|
फिलहाल कांग्रेस के सूबेदार कैप्टन अमरिंदर सिंह फूंक-फूंक कर कदम उठा रहे हैं। कद्दावर नेताओं को पार्टी में शामिल कर यह संदेश देने की कोशिश है कि सूबे में हवा कांग्रेस की ही बन रही है। नोट बंदी ने ना केवल सत्तारूढ़ गठबंधन बल्कि विपक्ष को भी नंगा कर दिया है साथ ही सत्ता पक्ष के की बची खुची साख नोटबंदी के फैसले की भेंट चढ़ गई। लोगों का धीरज चुक गया है। उन्हें अब प्रधानमंत्री की इस सलाह पर यकीन नहीं होता कि पचास दिन बाद उनका स्वर्ण काल शुरू हो जाएगा। इसलिए पंजाब का ऊंट किस करवट बैठता है यह देखना दिलचस्प होगा|





किस गलत-फहमी में जी रहा है इस पोस्ट का लेखक ? मैंने अभी कुछ दिन चंडीगढ़ पटियाला लुधियाना अंबाला राजपुरा भटिंडा आदि का दौरा किया है ! समूचे पंजाब में मोदी सरकार की लहर चल रही है और इसे देखते हुए ये भी तय हैं कि इसका फायदा भाजपा को ही मिलेगा !