मज़े मारे झुम्मन मियाँ, लात खाए लल्लन मियाँ

अभी UP में चुनाव चल ही रहे थे कि “मज़े मारे झुम्मन मियाँ, लात खाए लल्लन मियाँ” वाली कहावत सही सिद्ध हो गई| दरअसल एक समाचार प्रकाशन समूह के अंग्रेजी वेबसाईट पर एग्जिट पोल दिखाया गया| परन्तु उसका दंश उसके हिंदी एडिशन के सम्पादक को सहना पड़ा| चुनाव आयोग के गाइड लाइन के उलन्घन में उनको गिरफ्तार कर लिया गया| जब कि अबतक यह नही पता चला कि इस एग्जिट पोल का संचालन किस कम्पनी ने किया|

जिस दो कंपनी की और इशारा जाता है उसमे से एक कंपनी का MD राजीव गुप्ता है जिनका दावा है कि उनकी कंपनी सर्वे नही कराती| और दूसरी कंपनी को देवेन्द्र कुमार चलते है जिनको अमित शाह के करीबे बताये जाते है| देवेन्द्र भी किसी एग्जिट पोल के बारे में अनभिज्ञता बताते है|

उडती चिड़िया को खबर लगी है कि इस एग्जिट पोल की खबर लगते ही चुनाव आयोग ने 15 जगह FIR करवाया था| फिर गाजिअबाद के एक थानेदार ने गजब की तत्परता दिखाते उस हिंदी सम्पादक को रातो रात गिरफ्तार कर लिया परन्तु जिस अंग्रेजी वेबसाईट पर यह पोल दिखाया गया था उसके सम्पादक से थानेदार साहेब पूछताछ भी नही कर पाए| हो सकता है थानदार साहेब का अंग्रेजी में हाथ तंग रहा हो या उनपर अंग्रेजी का रोब ग़ालिब हो गया हो| कुछ भी हो इसी को कहते है ”मज़े मारे झुम्मन मियाँ, लात खाए लल्लन मियाँ”|

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