सबसे सयाने सीएम रघुबर दास
झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुबर दास सयाने CM है हलाकि की वे और बीजेपी के अन्य CM की तरह अपने को चमकाने में नहीं रहते| नोट बंदी होते ही राधुबर दास ने ताड़ लिया कि यदि राज्य सरकार ने ढील दिया तो उनके राज्य में भी वही सब दिक्कत होगी जो पडोसी राज्य पश्चिम बंगाल के लोगों को हो रही है| यह दिक्कत होना स्वाभाविक है क्योंकि बैंक के पास पर्याप्त पैसा नही पहुच पा रहा था| फिर वे लोगों को कहां से देते| कभी एक हजार के हिसाब से तो कभी दो हजार के हिसाब से बांट दिए।
रघुबर दास ने झारखंड में ऐसी किल्लत नहीं होने दी। शुरू में जरूर लोगों को जरूरत के मुताबिक रकम नहीं मिल रही थी। पर बाद में स्थिति तेजी से सुधरी। हालांकि विरोधी तो फिर भी कटाक्ष करने से बाज नहीं आए। चुटकी ले रहे हैं कि केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी की सरकार ठहरी। वह क्यों होने देगी नोट की कमी। जबकि यह दिक्कत अन्य बीजेपी शासित राज्यों में आई| और तो और केद्र के सीधे नाक के नीचे दिल्ली में जितनी नोटों कि दिक्कत हुयी उतनी तो अन्य किसी राज्य में नहीं हुयी| दूसरे राज्यों ने भी विरोध में वक्त खपा दिया। चाहते तो दिलचस्पी लेकर वे भी तो झारखंड के मुख्यमंत्री जैसी कारगर व्यवस्था कर सकते थे।
इस मामले में बिहार और उड़ीसा सरकारों ने भी कारगर कदम उठाते हुए लोगो को कम से कम दिक्कत होने दिया| मगर झारखण्ड के मुख्यमंत्री ने उन सबसे एक कद आगे बढ़ाते हुए सबसे पहले अपने राज्य के कुछ क्षेत्रो को कैशलेस बनाने के लिए कारगर कदम उठाये|
काश अन्य मुख्यमंत्री, ख़ासकर सत्तारूढ़ बीजेपी के मुख्यमंत्री, अपनी छवि चमकाने की अपेक्षा नोट बंदी पर रघुबर दस के नक़्शे कदम पर चलने का प्रयास करते|
यह सही है की केवल लफ्फाजी से नोट बंदी में हुयी किल्लत औत इस किल्लत के कारण लोगो को उनके रोज़गार में हुयी नुकसान की भरपाई बातो से, विज्ञापन से नहीं बल्कि ठोस धरातल पर काम करने से होगी|




