मेयर पर खीचम खीच मैं खींचू तू भी खीच

मुंबई| अभी हाल में निपटे BMC के चुनाव में मामला मेयर पर अटक गया है| इस चुनाव में तब बड़ी टेंशन हो गई जब शिवसेना के पुराने परन्तु BMC में रहे जूनियर पार्टनर बीजेपी ने अगल से चुनाव लड़ कर उन्सो कड़ी टक्कर दिया|

किसी को आशा भी नही थी कि बीजेपी इस कहाव में शिवसेना के इतने करीब पहुच जाएगी और परिस्थित इस तरह बन जायेगी कि या तो शिवसेना और बीजेपी फिर से हाथ मिलाकर मेयर का चुनाव करे या फिर अन्य पार्टियों के पैर पड़ें ताकि मेयर के चुनाव में निष्क्रिय भूमिका अपनाते हुए शिवसेना और बीजेपी में दो दो हाथ हो जाने दे|

उडती चिड़िया को पक्की खबर है कि मेयर का चुनाव बहुमत वोट से होता है, काफी कुछ संसद के सभापति की तरह| जिसको अधिक वोट मिले वह मेयर बनता है| ऐसी हालत में यदि शिवसेना और बीजेपी के अतिरिक्त अन्य पार्टी वोट ना करें तो ये दोनों अपने और अपने समर्थक निर्दलीय उम्मीदवारों के बलपर मेयर चुन सकती है|

इस हालत में शिवसेना का पल्ला भारी नज़र आता है क्योंकि उसे ना केवल 4 निर्दलीय का समर्थन प्राप्त है बल्कि MNS का भी समर्थन प्राप्त होने की खबर है|

कुछ भी हो और कंही की भी नगर निगम का मामला हो नगर प्राषद सांसद भी नही बनाना चाहता क्योंकि उसको लोकल लोगो से इतना प्यार होता है और उनकी सेवा करने की इतनी इच्छा होती है की वह मरकर भी वही प्राषद बना रहना चाहता है| फिर यह मामला तो BMC का है जिसका 37000 करोड़ के बजट से अपने मानुस की सेवा करनी हो तो आवाज़ आएगी ही “मेयर पर खीचम खीच; मैं खींचू तू भी खीच

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