मध्यप्रदेश में मंत्रियो की बयानबाजी
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान थोड़ा दूजे किस्म के मुख्यमंत्री है| उनके मुहं से कभी-कभी सच बात निकल जाती है| पिछले दिनों पुलिस मुख्यालय में में पुलिस की समीक्षा मीटिंग में मुख्यमंत्री ने कह डाला की वे इस बात को मान ही नही सकते कि ऐसा कोई अपराधी है जिसके बारे में पुलिस को जानकारी न हो। अगर आईजी, डीआईजी और एसपी खुद सड़क पर उतर जाएं तो अपराध हो ही नहीं सकते।
मध्यप्रदेश पुलिस के भ्रष्टाचार मुख्यमंत्री शिवराज चौहान हैरान-परेशान बताये जाते है| और क्यो ना हो? रिपोर्ट के अनुसार 2015 में 1589 पुलिस वालों की शिकायतें मिली थीं। 1236 के बारे में मिली शिकायतें सही निकलीं। सो, विभागीय जांच के बाद 139 को नौकरी से निकाला तो 52 को वक्त से पहले रिटायर कर दिया। इसके अतिरिक्त मध्यप्रदेश में रोजाना औसतन चार पुलिसवालों के खिलाफ रोजाना भ्रष्टाचार व पद के दुरुपयोग के आरोप में विभागीय जांच शुरू करनी पड़ती है|
एक तरफ मुख्यमंत्री पुलिस पर अपनी नाराज़गी जाता रहे है तो दूसरी तरफ अन्य मंत्री की अपने क्षोभ को प्रगट करने से नही झिझक रहे है| राशन के वितरण में धांधली के मुद्दे पर क्षुब्ध कृषि मंत्री गौरी शंकर बिसेन ने तो यहाँ तक कह डाला की कोई मध्यप्रदेश में सरकारी तंत्र से ईमानदारी की तो कल्पना भी नही कर सकता|
तो उधर पूर्व मुख्यमंत्री सुंदर लाल पटवा की शोक सभा में पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर कहते हैं कि आजकल रिश्वत के बिना काम होते ही नहीं। नेता भी काम के बदले सूटकेस मांगते हैं। उनके जमाने में स्थिति थोड़ी बेहतर थी। सूटकेस वापस मिल जाता था।
इन सब बयानों पर सफाई देने से बचते हुए जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा दाये बाए करते नजर आये|




