दही चूड़ा का शतरंजी दंगल
दही चूड़ा का शतरंजी दंगल
जैसा की उडती चिडिया पहले भी खबर दे चुकी है कि मुख्यमंत्री नीतीश निवास पर 14 जनवरी को मकर संक्रांति के मौके पर चूड़ा-दही भोज के आयोजन में भाजपा नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है। जिसे राजनैतिक हलके में उभरते नए राजनैतिक समीकरण के रूप में देखा जा रहा है| निश्चित तौर पर लालू प्रसाद ग्रुप इसे नाराज़गी से देख रहा है|
वैसे यह नाराज़गी 10 माह शराब बंदी के कारण चालू हुई थी| क्योंकि नितीश कुमार ने देसी शराब बंदी करते करते विदेशी शराब भी बंद कर दिया| इस बंदी के कारण प्रान्त को राजस्व की हानि तो हुई साथ ही कई बड़े लोगो को भी भयंकर नुक्सान भी हुआ| शराब बंदी फैसले को लालू ने जल्दबाजी में लिया गया अव्यवारिक फैसला माना था| परन्तु अपने दोनों सुपुत्रों के राजनैतिक भविष्य ने उनको मुहं नहीं खोलने दिया|
सूत्र बताते हैं कि देश के बड़े शराब माफिया ने महागठबंधन के एक महारथी को भर भर कर नोटों की बोरियां भेजी है ताकि शराब का धंदा फिर से चालु हो सके| वैसे भी शराबबंदी के बावजूद राज्य में इसका गुपचुप कारोबार धड़ल्ले से जारी है। सूत्र बताते हैं कि उस महान महारथी ने अपनी वरदहस्त एक जाति विशेष के लोगों के सर पर रख दिया है ताकि वे इस गैर कानूनी धंधे को दुरुस्त रूप में चला सकें| यह सब देख प्रशासन भौचक्का है और कुछ भी करने में असमर्थ बताया जा रहा है| सीएम भी अनजान बनाने का नाटक करते नज़र आरहे है| क्योंकि मुंह खोलने का मतलब कुर्सी से छुट्टी|
इसलिए नितीश की दही चूड़ा का जवाब देते हुए राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने दो दिवसीय दही-चूड़ा भोज में पहले दिन महाबठबंधन के साथी और दूसरे दिन अल्पसंख्यक समुदाय के लोग चूड़ा-दही का लुत्फ उठाएंगे। लालू यादव भी समझते हैं कि नीतीश कुमार किसी भी हालत में अगले विधान सभा चुनाव से पहले उनसे रिश्ता नहीं तोड़ेंगे क्योंकि 17 प्रतिशत अल्पसंख्यक वोट बैंक का सवाल है।
परन्तु उडती चिड़िया का अनुमान है कि इसबार नितीश दही चूड़ा और लालू दही चूड़ा का शतरंज कुछ नया गुल खिला कर ही रहेगा|



