दही चूडा की राजनीति
सम्भवत: इस बार अधिक ठण्ड के कारण बिहार की राजनीति करवट ले रही है क्योंकि जून 2013 में बीजेपी और बिहार की सत्ताधारी पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) का गठबंधन टूटने के बाद इस मकर-संक्रांति में पहली बार जनता दल (यूनाइटेड) ने बीजेपी के नेताओं को दही चूडा पर आमंत्रित किया है| हो सकता है आगामी शनिवार को मकर संक्रांति के मौके पर सत्ताधारी जनता दल (यूनाइटेड) और विपक्षी दल भाजपा के बीच बात दही चूडा से ऊपर उठाकर कुछ और भी बात हो जाए|
ज्ञात हो की यह न्योता बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी फैसले को दिए समर्थन देने के बाद आया है। सम्भवत: बदले में पीएम मोदी ने भी बिहार में शराब बंद करने के नीतीश के फैसले की तारीफ की थी। हालांकि बिहार भाजपा के कुछ नेताओं ने निषेध कानून में कड़े प्रावधानों को लेकर जेडीयू का विरोध किया था। उन्होंने इसे ‘काला कानून’ तक बताया था। हालांकि भाजपा अब राज्य सरकार द्वारा शराबबंदी के समर्थन में 21 जनवरी को प्रस्तावित विश्व की सबसे लंबी मानव श्रृंखला का समर्थन कर रही है।
जेडीयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने इस दही चूडा के निमंत्रण को सकारात्मक राजनीति की शुरुआत बताया है। उन्होंने इस तरह के कदम को सकारात्मक राजनीतिक का अंग बताते हुए इसमें किसी तरह के छिपे हुए लाभ से इनकार किया|
अभी हाल में गुरु गोविंद सिंह के 350वें प्रकाश पर्व के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जहाँ उपरी मंच पर विराजमान नितीश कुमार और नरेंद्र मोदी एक दुसरे की तारीफ़ में व्यस्त थे वंही जेडीयू के सत्ता के सहयोगी आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ग्राउंड पर बैठे अपनी नाराजगी छुपा भी नहीं पा रहे थे| निश्तिच तौर पर इस दही चूडा के प्रोग्राम में लालू और उनके करीबी दाल में काले देख रहे होंगे|




