हिमाचल में क्रिकेट पर जंग
ऐसे तो हिमाचल क्रिकेट बोर्ड के सर्वोसर्वा अनुराग ठाकुर की आजकल BCCI तक में तूती बोल रही है परन्तु उच्यातम न्यायालय द्वारा क्रिकेट बोर्ड की धांधली पर निगाह रखने के लिए नियुक्त “लोधा कमेटी” BCCI पर पैनी निगाह रखे हुयी है| जिसके कारण उनको उच्यतम न्यायलय ने उन पर तीखी टिप्पड़ी भी किया है| यह माना जा सकता है कि अनुराग ठाकुर पर शनि की छाया चल रही है|
ऐसे में अनुराग ठाकुर से छत्तीस का आंकड़ा रखने वाले हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह अनुराग ठाकुर से अपने पुराने बैर निकालना चाहते है| परन्तु हिमाचल में महामहिम राज्यपाल देवव्रत आचार्य अपने सूबे के मुख्यमंत्री की सहायता करना तो दूर. वीरभद्र सरकार द्वारा पारित खेल विधेयक पर कुंडली मारकर बैठ गए है| राज्यपाल ने न इसे मंजूरी दी और न रद्द किया है। जबकि वीरभद्र सिंह उनसे जल्द फैसला करने का कई बार आग्रह करते हुए उनको राज्यपाल संवैधानिक दायित्व का बोध भी करा चुके है| मुख्यमंत्री के हिसाब से राज्यपाल केंद्र के दबाव में है।
मजेदार बात तो यह है कि टीसीपी अधिनियम पर तो कांग्रेस और भाजपा दोनों ही रजामंद हैं। राज्यपाल है कि उसको ही मंज़ूर नहीं करते| इस विधेयक के लटकने से 35 हजार भवन स्वामियों को जो नुकसान हो रहा है, उससे शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा बहुत दुखी लगते है| यह दूसरी बात है कि क्रिकेट स्टेडियम में पेड़ काटे जाने को लेकर शहरी विकास मंत्री अपने मुख्यमंत्री की सहायता करने के मूड में नज़र नहीं आते जबकि इसके ज़रिये अनुराग ठाकुर को घेरना आसान होगा| परन्तु राजनीति में शक्तिशाली शत्रु से शत्रुता ना लेना बुद्धिमानी मानी जाती है| चर्चा है कि इस विधेयक पर हाईकोर्ट की कुछ आपत्तियां के कारण राज्यपाल चुप्पी साधे हैं। वीरभद्र चाहते हैं कि राज्यपाल या तो विधेयक को मंजूरी दें या फिर अपनी आपत्तियों और सुझावों के साथ लौटा दें।
इस घटना क्रम को देखते हुए यह कहना अनुचित ना होगा कि राजनीति में अनीत भी एक नीति होती है|




