बिना बिचारे जो कर वो पाछे पछताय
ममता बनर्जी कि राजनैतिक पारी आन्दोलन से शुरू हुयी थी और वे सिंगूर और नंदीग्राम में ज़मीन अधिकरण के खिलाफ आंदोलन की अगुआई से सत्ता में आई थीं| और अब ज़मीन अधिकरण के खिलाफ आन्दोलन ही उनके गले की फांस बना हुआ है| वो कहते है की ममता जी! बिना बिचारे जो कर वो पाछे पछताय| हुआ ये की सत्ता […]
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