बीजेपी के बयान बहादुर
बीजेपी में बयान बहादुरों की कोई कमी नहीं| खासकर इन बयान बहादुरों की जुबान उस समय ज़रूर खुलती है जब इनको चुप रहने की सख्त ज़रूरत होती है| दिल्ली चुनाव में अमित शाह का “जूमला” या बिहार चुनाव के समय मोहन भागवत का “आरक्षण पर पुनर्विचार” के बयान हो या गौ-रक्षा के गैर ज़रूरी और भड़काऊ भाषण हो|
इसी सिलसिले को बढाते हुए हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने महात्मा गांधी को लेकर विवादित बयान दिया है। विज ने कहा कि ”गांधीजी के नाम से खादी पेटेंट थोड़ी हो गया। जब से खादी के साथ गांधी का नाम जुड़ गया खादी डूब गई। खादी उठ ही नहीं पाई। गांधी का ऐसा नाम है जिस दिन से नोट पर चिपक गए उस दिन से नोट की कीमत गिर गई। तो अच्छा किया है गांधी का हटा के मोदी का किया है। मोदी ज्यादा बैटर ब्रैंड नेम है। मोदी का नाम लगने से खादी की सेल 14 प्रतिशत बढ़ी है।”
शोरशराबा के बाद उन्होंने बयान वापस ले लिया। वहीं भाजपा ने भी अपने आप को इस बयान से किनारे कर लिया है। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने उनके बयान को उनका निजी बयान बताया।
बेहतर होता की बीजेपी और संघ के लोग सोच समझकर मुहं खोले और उससे भी बेहतर होगा की अपने बयान अपने विभाग तक ही सीमित रखे और उससे भी अच्छा होगा की अधिकाँश समय चुप रहे ताकी मोदी और उनकी सरकार बिना विवाद में पड़े अपना काम करे|




