स्वामी गुप्त मिशन पर
भले बेबी को बेस पसंद होगा परन्तु धुरंधर नेता सुब्रमनियम स्वामी को गुप्त बाते और गुप्त मिशन बहुत पसंद है| कभी 1990-91 में वाणिज्य, विधि एवं न्याय मन्त्री रहे स्वामी को मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में जगह ना पाने का हार्दिक दुःख है| स्वामी अपने आपको वित्तमंत्री पद का सशक्त उम्मीदवार तो पाते ही हैसाथ ही वे जेटली को इस पद के लिए सर्वथा अयोग्य भी पाते है|
अब उनका दुर्भाग्य देखिये की मोदी में प्रधानमत्री बनते ही 75 वर्ष से उपर के नेताओं को मार्गदर्शक के श्रेणी में रख दिया| परन्तु सौभाग्यवश स्वामी मार्गदर्शक बनाये जाने से बच गये| परन्तु मंत्रिपद तो हाथो से सरक ही गया ना|
कुछ दिन पहले उडती चिड़िया को स्वामी और मोदी बात करते दिखे| दरअसल मोदी सरकार के न्यायपालिका से समीकरण अच्छे नही है| साथ ही सरकार वर्तमान अटोर्नी जनरल से भी खुश नज़र नहीं आती| अमित शाह उनके स्थान पर अपना आदमी लाना चाहते है| जिसको तकरीबन हरी झंडी भी मिल गई है|
अब आवश्यकता है न्यायपालिका से सम्वाद कायम करने की जिसकी ज़िम्मेदारी मोदी ने स्वामी को दिया है| क़ानून स्वामी की कमजोरी भी है और उनका पसंदीदा काम भी; और उनको उस काम में बहुत मज़ा आता है जिसमे कुछ स्क्रेसी हो| हालांकी यह काम वर्तमान मुख्य-न्यायाधीश में रहते सम्भव नहीं लगता| अथ:: स्वामी का काम है कि वे अपने परम मित्र पूर्व क़ानून मंत्री हसराज भारद्वाज के ज़रिये मनोनीत मुख्य-न्यायाधीश केहर से सम्वाद कायम करे जिनसे हंसराज के रिश्ते बहुत मधुर बताये जाते है| यदि यह सम्भव हुआ तो ना केवल नये न्यायाधीशों की नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त होगा बल्कि कार्यपालिका और न्यायपालिका में बेहतर सम्बन्ध स्थापित होगे|




