अडवानी को अनंत कुमार पर गुस्सा क्यों आता है?

सबने देखा की संसद में होने वाले हुडदंग और फलस्वरूप संसद की कार्यवाई में बार-बार बाधा पहुचने से बीजेपी के मार्गदर्शक एवं वरिष्टतम नेता लाल कृष्ण अडवानी बहुत नाराज़ हो गए थे| उनकी नाराजगी इतनी बढ़ी कि अडवानी ने स्पीकर की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया| जिसके स्पष्टीकरण देने के लिए उनको सुमित्रा महाजन से मिलना भी पड़ा| परन्तु फिर दूसरे दिन वे संसद के अन्दर ही संसदीय मंत्री अनंत कुमार पर भी भड़क पड़े|

देखने में यह सब अडवानी जी का लोकतंत्र के प्रति अपार प्रेम की तरह लगता है| परन्तु उडती चिड़िया को इसके अन्दर की कहानी का पता चला|

दरअसल कुछ दिन पहले अडवानी के घर लंच था जिसमे अडवानी के चुननंदे भक्त मंत्री जैसे अनंत कुमार, रविशंकर प्रसाद शामिल थे| खाने खाते समय पता चला कि इस लंच का असली मीनू अडवानी को कैसे अगला राष्ट्रपति बनाया जाये| बेचारे अडवानी जी तो उपराष्ट्रपति पद के लिए भी तैयार हो गए| परन्तु परम भक्त मंत्रीगण उनको राष्ट्रपति पद से कम का दर्जा देने को तैयार ही ना थे| अत: तय हुआ के 3-4 मंत्री अनंत कुमार के नेत्रित्व में प्रधानमंत्री से मिलकर अडवानी जी को राष्ट्रपति पद के लिए मनोनीत करने के लिए तैयार करेंगे|

परन्तु बाहर निकलते ही अनंत कुमार समेत बाकी मत्री का जोश भी ढीला होगया| और कोई अडवानी जी का नाम राष्ट्रपति पद के लिए आगे ना कर दे इसलिए पहले सुषमा स्वराज और उसके बाद सुमित्रा महाजन का नाम आगे बाधा दिया गया|

अनंत कुमार की यह ढुलमुल बात और सुमित्रा महाजन का नाम आगे आना अडवानी जी को अखर गई जिसके लिए उनको अपना गुस्सा रोकते ना बना और वे संसद के अंदर ही अनंत कुमार पर नाराज़ हो गए| अडवानी जी! करम गति टाले नहीं टली|

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