संजय लीला भंसाली पिटाई काण्ड
संजय लीला भंसाली की पिटाई ने एकबार फिर हिंसात्मक विरोध को हवा दे दिया| साथ ही सच्चे झूठे विरोध था समर्थन का दौर भी शुरू हो गया|
टीवी पर जैसा की उडती चिड़िया ने सुना कि इतिहासकार इरफ़ान हबीब बता रहे थे कि 1940 में किसी ने रानी पद्द्मावती पर उपन्यास लिख कर इस चरित्र का निर्माण किया था जबकि इसका कोई एतिहासिक वजूद नहीं है|
उडती चिड़िया ने तो यही पढ़ा है की मालिक मोहम्मद जायाजी 1540 में पद्मावत लिखा था| अब चिड़िया तो चिड़िया ही होती है| हो सकता है कि जायसी ने पद्मावत 1940 में लिखा रहा हो जिसे चिड़िया ने गलती से 1540 पढ़ लिया हो|
वैसे मात्र 150 वर्ष के भीतर लिखा गया एतिहासिक काव्य आधारहीन हो ही नही सकता| ख़ासकर जब कवि एक सूफी हो जिसे किसी को खुश ना करना रहा हो| और वह राजपूतो के राज्य में ना रहकर मुसलमान राज्य में रहता रहा हो|
वैसे होने को क्या नही हो सकता|




