मनीष तिवारी और कोंग्रेस को उनकी शिक्षा
अपने बेबाक और बेलौस बोल के लिए मशहूर मनीष तिवारी आजकल मीडिया की चमक-दमक से दूर रहने का प्रयास करते है| वे पिछले लोकसभा के चुनाव में भी ना तो खड़े हुए ना ही खुल कर कांग्रेस के समर्थंक में प्रचार किया| पेशे से अधिवक्ता मनीष तिवारी उस समय चमक कर तेज़ी से उभरे जब उन्होंने अन्ना हजारे को सेना का भगोड़ा और भ्रष्टाचार का पुतला बोला था| उनके इस वक्तव्य की तक़रीबन सभी ने निंदा किया था| कुछ ने खुलकर तो कुछ ने दबी जुबान में| कोंग्रेस के आलाकमान ने भी उनके इस बयान का समर्थन ना करते हुए यह उनका निजी बयान बताया था क्योंकि उस समय कोंग्रेस अन्ना हजारे से समझौता करने के फिराक में थी|
यह तो हुयी विगत समय की बात| लगता है मनीष तिवारी ने चुनाव में हुयी शर्मनाक पराजय और फिर पार्टी के गहमागहमी से दूर रहकर काफी आत्म-निरक्षण किया है क्योंकि अब या तो वो बोलते नहीं या उनके बोल संतुलित होते है| वैसे कांग्रेस पार्टी हमेशा कुछ उलटे-सीधे बोलने वालो को हमेशा आगे रखती आई है| इसलिए आजकल मनीष तिवारी का स्थान शेहजाद पूनावाल जैसे “होनहार” नवयुवको ने ले लिया है, जिन्होंने अपनी राजनीति की शुरुवात बयानों से ही शुरू किया है|
खैर मनीष तिवारी उस समय शेहजाद पूनावाल पर खफा हो गए जब शेहजाद पूनावाल ने नए आर्मी चीफ जनरल रावत के नियक्ति पर इस तरह सवाल उठाया मानो मोदी सरकार ने जानबूझ कर जनरल बक्षी के वरीयता को केवल इसलिए दरकिनार कर दिया ताकि मुस्लिम जनरल पी एम हरीज, जो वरीयता क्रम में नम्बर दो पर थे, कभी भी भारतीय सेना के चीफ ना बन पायें|
शेहजाद पूनावाल ने tweet करके बोला था “Lt Gen Praveen Bakshi was senior most and according to the line of succession due to become chief. Had Modi not appointed Lt Gen Rawat out of turn as Army chief, Lt Gen Hariz would have been the first Muslim to head the Army after Lt Gen Bakshi. But Modi did not want it,”
इसपर मनीष तिवारी ने कहा “Shehzad Poonawalla used to be my intern. He used to work with me. And I think it is absolutely inappropriate, with all due respect to him, to try and bring religion in these appointments. The fact is that there is a principle of seniority and hierarchy and that needs to be respected,“
बात कुछ भी हो मनीष तिवारी 2.0 का नया संस्करण स्वागत योग्य है| ध्यान रहे पाकिस्तान तथा अन्य राष्ट्रीय महत्त्व के विषयों में नये मनीष तिवारी पहले भी कांग्रस से हटकर राय देते आये है|




